बिहार, भारत का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध राज्य है, जहाँ प्राचीन काल से लेकर मध्यकालीन इतिहास तक की झलक मिलती है। इस राज्य में कई ऐसे किले हैं जो न केवल स्थापत्य कला के अद्भुत उदाहरण हैं, बल्कि बिहार के गौरवशाली अतीत के प्रतीक भी हैं। ये किले राजाओं, साम्राज्यों और स्वतंत्रता संग्राम की कहानियों को अपने भीतर समेटे हुए हैं। बिहार के किलों का निर्माण रणनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखकर किया गया था। इन किलों की भव्यता और ऐतिहासिकता न केवल देश के इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करती है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी अद्वितीय आकर्षण का केंद्र हैं।
इस लेख में हम बिहार के प्रमुख किलों के इतिहास, वास्तुकला और उनकी विशेषताओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
रोहतासगढ़ किला
रोहतासगढ़ किला बिहार के रोहतास जिले में स्थित एक प्राचीन किला है ऐसी मान्यता है की इस किले का निर्माण त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा त्रिशंकु के पौत्र व राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहिताश्व ने कराया था इस किले की परिधि 45 किमी तक फैली हुई है। इसमें कुल 83 दरवाजे हैं
सासाराम किला
सासाराम शहर बिहार के रोहतास जिले में स्थित है और रोहतास जिले का मुख्यालय भी है और यहीं शेर शाह सूरी द्वारा निर्मित एक किला भी स्थित है
पलामू किला
पलामू भारत के झारखण्ड राज्य के उत्तर पश्चिम में झारखण्ड और बिहार के सीमा पर स्थित है यहाँ दो किले स्थित है जो जर्जर स्थिति में है जिन्हें ‘पुराना किला’ और ‘नया किला’ कहा जाता है। ये दुर्ग चीरो राजवंश के राजाओं ने बनवाया था
जलालगढ़ का किला
जलालगढ का किला, बिहार राज्य के पूर्णिया जिला में जलालगढ़ में स्थित है इस किले को मुग़ल कालीन मन जाता है लेकिन इसके निर्माणकर्ता के बारे में कोई जानकारी नहीं है
मुंगेर का किला
मुंगेर भारत के बिहार राज्य में स्थित एक शहर एवं जिला है। मुंगेर बंगाल के अंतिम नवाब मीरकासिम की राजधानी भी था। यहीं पर मीरकासिम ने गंगा नदी के किनारे एक भव्य किले का निर्माण कराया जो 1934 में आए भीषण भूकम्प से क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन इसका अवशेष अभी भी शेष है
हथुआ किला
हथुआ किला बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित है
