हिमाचल प्रदेश भूगोल (Himachal Pradesh Geography)
इस पोस्ट में हम हिमाचल प्रदेश भूगोल एवं भौगोलिक संरचना (Himachal Pradesh Geography in Hindi) हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति आदि के विषय में पढ़ेंगे।
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति (Geographical location of Himachal Pradesh)
हिमाचल प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित एक हिमालयी राज्य है इस राज्य का कुल क्षेत्रफल 55673 वर्ग किमी. है। जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 1.69% है हिमाचल प्रदेश समूत्र तल से 350 से 6975 मीटर की के मध्य स्थित है।
हिमाचल प्रदेश का अक्षांशीय विस्तार 30°22’40” उत्तर से 33°12’40” उत्तर तक उत्तरी अक्षांश और का देशान्तरीय विस्तार 75°45’55” पूर्व से 79°04’20” पूर्व (पूर्वी देशान्तर) के मध्य है
हिमाचल प्रदेश में कुल 12 जिलें है राज्य का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला लाहौल-स्पीति और सबसे छोटा जिला हमीरपुर है
राज्य की सीमा की कुल लंबाई 1170 किमी है हिमाचल प्रदेश के उत्तर में जम्मू कश्मीर, दक्षिण में हरियाणा, दक्षिण- पश्चिम में पंजाब, दक्षिण पूर्व में उत्तराखंड राज्य और पूर्व में तिब्बत है
पंजाब से हिमाचल प्रदेश के सर्वाधिक पाँच जिलों की सीमा लगि है और प्रदेश के सबसे अधिक जिलों की सीमा से लगा जिला कांगड़ा और मंडी ये दोनों जिलें की सीमाएं 6 जिलों की सीमाओं को स्पर्श करती है
हिमाचल प्रदेश की राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय सीमाएं
| देश / राज्य | सीमा स्पर्श करने वाला जिले का नाम |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | सिरमौर |
| जम्मू-कश्मीर | चम्बा, कांगड़ा |
| हरियाणा | सिरमौर, सोलन |
| पंजाब | सोलन, चम्बा, कांगड़ा, ऊना, बिलासपुर |
| उत्तराखंड | शिमला, सिरमौर, किन्नौर |
| तिब्बत (चीन) | किन्नौर, लाहौल-स्पीति |
हिमाचल प्रदेश का भौगोलिक विभाजन (Geographical Division of Himachal Pradesh)
हिमाचल प्रदेश राज्य को भौगोलिक स्थिति के आधार पर चार भागों में विभाजित किया जाता है
- शिवालिक / बाह्य हिमालय
- मध्य हिमालय
- वृहत हिमालय
- जास्कर श्रंखला
शिवालिक / बाह्य हिमालय
यह हिमाचल प्रदेश का सबसे बाह्य और निचला भाग है इसकी औसत ऊंचाई 1500 मीटर है इस क्षेत्र के अंतर्गत सिरमौर , मंडी, सोलन, कांगड़ा, विलासपुर और हमीरपुर जिलों के निचले भाग आते हैं यह क्षेत्र मक्का, गन्ना, धान, गेहूं आदि के उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
मध्य हिमालय
यह क्षेत्र समुद्र तल से 1500 मीटर से 4600 मीटर की ऊंचाई के मध्य स्थित है इस क्षेत्र में धौलाधर और पीरपंजाल पर्वत पर्वत श्रंखलाएं स्थित है
धौलाधार पर्वत श्रंखला कांगड़ा, चम्बा और मंडी जिलों में स्थित है और पीरपंजाल पर्वत श्रंखला का अधिकांश भाग चम्बा जिले में स्थित है
वृहत हिमालय
इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाइ 5000 – 6000 मीटर के मध्य है यह क्षेत्र राज्य के पूर्वी सीमा पर स्थित है इस क्षेत्र में ऊंचाई अधिक होने के कारण पेड़ व झाड़ियाँ बहुत कम होते हैं परांग, काँगला, बारालाचा और कुंजम इस क्षेत्र के प्रमुख दर्रे हैं।
जास्कर श्रंखला
जास्कर श्रंखला राज्य की अंतिम पर्वत श्रंखला है यह राज्य के पूर्व में स्थित है जास्कर श्रंखला को सतलुज नदी एवं शिपकीला दर्रा दो भागों में विभाजित करते हैं हिमाचल की सबसे ऊंची पर्वत चोटी शिल्ला (7026 मीटर) जास्कर श्रंखला में ही स्थित है।
हिमाचल प्रदेश की जलवायु एवं मृदाएँ
हिमाचल प्रदेश एक हिमालयी राज्य है जो समुद्र तल से 350 से 7000 मीटर की ऊंचाई के मध्य स्थित है ऊंचाई के अनुसार यहाँ की जलवायु एवं मृदा में भी भिन्नता पाई जाती है इस पोस्ट में हम हिमाचल प्रदेश की जलवायु एवं मृदाएँ के बारे में विस्तार से जानेंगे।
हिमाचल प्रदेश की जलवायु
- हिमाचल प्रदेश में मुख्यतः उपोष्ण कटिबंधीय एवं अर्द्ध ध्रुवीय प्रकार की जलवायु पारी जाती है।
- समुद्र तल से 1000 मीटर से कम ऊंचाई वाले इलाकों में कम आद्र ऊष्ण कटिबंधीय व गरम जलवायु पाई जाती है।
- समुद्र तल से 900 से 1800 मीटर वाले इलाकों में हल्की गर्म व शीतोष्ण जलवायु पाई जाती है।
- समुद्र ताल से 1900 – 2400 मीटर ऊंचाई वाले स्थानों में ठंडी व शीतोष्ण जलवायु पाई जाती है।
- प्रदेश में अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में अक्टूबर से जनवरी तक हिमपात अधिक मात्र में होता है
- हिमाचल प्रदेश में स्थानीय भाषा मे ग्रीष्म ऋतु को तौदीं कहा जाता है, इस ऋतु में मैदानी इलाकों में अधिक गर्मी होती है ।
- ऊंचे हिमालयी इलाकों में ग्रीष्म ऋतु में मौसम सुहावना रहता है।
- हिमाचल प्रदेश में औसत 160 सेन्टमीटर वर्षा होती है।
- प्रदेश का सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र धर्मशाला (340 सेमी.) है।
- प्रदेश का सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र स्पीति (5 सेमी.) है।
हिमाचल प्रदेश की मृदा
हिमाचल प्रदेश के मैदानों से लेकर घाटियों व पहाड़ों तक अलग-अलग प्रकार की मृदा पाई जाती है हिमाचल प्रदेश के कृषि विभाग द्वारा यहाँ की मृदा को पाँच प्रकारों में विभाजित किया गया है
- निम्न पहाड़ी मृदा क्षेत्र
- मध्य पहाड़ी मृदा क्षेत्र
- उच्च पहाड़ी मृदा क्षेत्र
- पर्वतीय मृदा क्षेत्र
- शुष्क पहाड़ी मृदा क्षेत्र
निम्न पहाड़ी मृदा क्षेत्र
इस क्षेत्र के अंतर्गत 900 से 1000 मीटर ऊंचाई वाले स्थान शामिल हैं , इस प्रकार की मृदा में धान, गन्ना, गेहूं, मक्काआदि की फसल होती है।
मध्य पहाड़ी मृदा क्षेत्र
इस क्षेत्र के अंतर्गत 1000 से 1500 मीटर ऊंचाई वाले स्थान शामिल हैं यहाँ की मृदा अक्सर रेतीली होती है जो आलू, मक्का की खेती के लिए उपयोगी है।
उच्च पहाड़ी मृदा क्षेत्र
इस क्षेत्र के अंतर्गत 1500 से 2100 मीटर ऊंचाई वाले स्थान शामिल हैं इस क्षेत्र की मृदा बलुई दोमट व चिकनी दोमट प्रकार की होती है जिसका रंग भूरा होता है। जो फलों के उत्पादन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होती है।
पर्वतीय मृदा क्षेत्र
इस क्षेत्र के अंतर्गत 2100 से 3500 मीटर ऊंचाई वाले स्थान शामिल हैं इस क्षेत्र की मृदा गाद युक्त दोमट प्रकार की होती है जिसका रंग गहरा भूरा होता है ।
शुष्क पहाड़ी मृदा क्षेत्र
इस क्षेत्र के अंतर्गत 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थान शामिल हैं इस क्षेत्र में ऊसर प्रकार की मृदा पायी जाती है जिसमें नमी की मात्र बहुत कम होती है, यह मृदा मेवों के लिए उपयुक्त है।
