
उत्तराखंड के प्रमुख त्यौहार : उत्तराखंड, जिसे ‘देवभूमि’ कहा जाता है, अपनी खूबसूरत पहाड़ियों और अनोखी संस्कृति के लिए जाना जाता है। यहां के त्यौहार सिर्फ उत्सव नहीं हैं, बल्कि लोगों की परंपराओं, प्रकृति से जुड़ाव और आपसी प्रेम का प्रतीक हैं।
चाहे वसंत ऋतु का स्वागत करने वाला फूलदेई हो, या हरियाली का त्योहार हरेला, हर पर्व में राज्य की परंपराएं और प्रकृति से प्रेम झलकता है। इन त्यौहारों में संगीत, नृत्य और लोककथाओं के जरिए लोग अपनी संस्कृति को जीवंत बनाए रखते हैं।
आइए, उत्तराखंड के इन खास त्यौहारों को समझें और जानें कि ये क्यों इतने खास हैं।
उत्तराखंड के प्रमुख त्यौहार – Famous festival of Uttarakhand
हरेला
हरेला उत्तराखंड का एक प्रमुख त्यौहार है जो श्रावण मास के पहले दिन मनाया जाता है , इससे 10 दिन पहले एक बर्तन में 5 या 7 प्रकार के बीज बोये जाते है तथा हरेले के दिन इसे काटकर देवताओ को चढ़ाया जाता है
हरेला मानसून की शुरुआत और नई फसल की बुवाई का प्रतीक है। इस दिन लोग पौधे लगाते हैं और हरियाली के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक कृषि संस्कृति को बढ़ावा देता है।
फूलदेई (फूल संक्रांति)
फूलदेई चैत मास के प्रथम दिन मनाई जाती है इस दिन बच्चे घर-घर जाकर घरो की देहली पर फूल चढाते है और बच्चों को चावल, गुड व पैसे देते है।
बिखोती
उत्तराखंड में विषुवत संक्रांति को बिखोती के नाम से जाना जाता है जो बैशाख माह के पहले दिन मनाई जाती है फसल कटाई के मौसम का स्वागत करने के लिए यह पर्व मनाया जाता है।
घी संक्रांति (ओगलिया)
घी संक्रांति सितम्बर के मध्य में पड़ता है इस दिन सर में घी लगाया जाता है और घी खाया भी जाता है।
मकर संक्रांति (घुघुतिया)
मकर संक्रांति माघ माह के प्रथम दिन मनाई जाती है मकर संक्रांति को उत्तराखंड में उत्तरायणी के नाम से जाना जाता है इस दिन आटे व गुड के विशेष पकवान बनाए जाते हैं जिसे घुगुते कहते है घुगुते कौवे को भी खिलाए जाते हैं बच्चे बड़े उत्साह से “काले कौवे काले , घुगुती माला खाले” कहकर कौवे को बुलाते है इस दिन बच्चों के लिए घुगुतों की माला भी बनाई जाती है।
खतडुवा
यह त्यौहार कुमाऊं क्षेत्र में अश्विन माह के पहले दिन मनाया जाता है , यह त्यौहार पशुओ से सम्बंधित है इस दिन लोग घास और लकड़ियों से पुतला बनाकर जलाते हैं, जिसे बुरी शक्तियों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
रक्षा बंधन
उत्तराखंड में रक्षा बंधन को जन्यो-पुण्यो के नाम से भी जाना जाता है यह त्यौहार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है
चैंतोल
यह त्यौहार मुख्यतः पिथोरागढ़ जनपद में चैत माह में मनाया जाता है
जागड़ा
यह त्यौहार महासू देवता से सम्बंधित है
भिरौली
यह त्यौहार संतान कल्याण के लिए मनाया जाता है
नुणाई
यह त्यौहार देहरादून के जौनसार बाबर क्षेत्र में श्रावण मास में मनाया जाता है
Also read…
उत्तराखंड के प्रमुख लोकगीत व लोकनृत्य

