
बिहार एक सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर से भरपूर राज्य है, जहां हर साल कई मेले और त्योहार मनाए जाते हैं। ये मेले न केवल धार्मिक आस्थाओं को व्यक्त करते हैं, बल्कि राज्य की लोक परंपराओं और संस्कृति को भी जीवित रखते हैं। चाहे वह छठ पूजा हो, मकर संक्रांति या अन्य स्थानीय मेले, बिहार में हर त्योहार का अपना अलग महत्व और रिवाज है।
इस ब्लॉग में हम बिहार के प्रमुख मेले और त्योहारों के बारे में जानेंगे, जो यहाँ के लोगों के जीवन का एक अहम हिस्सा हैं और उनके उत्साह और खुशी का कारण बनते हैं।
सोनपुर पशु मेला
सोनपुर मेला बिहार में पटना से 25 किमी दूर सोनपुर में गंडक नदी के तट पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर-दिसंबर) में लगता हैं। यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला हैं इस मेले को ‘हरिहर क्षेत्र मेला’ के नाम से भी जाना जाता है और स्थानीय लोग इसे छत्तर मेला कहते है
वैशाली मेला
इस मेले का आयोजन बिहार के वैशाली में चेत्र शुक्ल त्रयोदशी को किया जाता है. वैशाली के इस मेले में पूरे देश के जैन धर्मावलंबी उपस्थित होते है
पितृपक्ष मेला
इस मेले का आयोजन बिहार के गया में प्रतिवर्ष सितम्बर-अक्टूबर में किया जाता है इस मेले में हिन्दू धर्म से सम्बंधित लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंड दान करते है
मंदार मेला
यह मेला प्रतिवर्ष बिहार के बांका जिले में मंदार पहाड़ी पर मकर सक्रांति के अवसर पर लगता है.
जानकी नवमी मेला
यह मेला प्रतिवर्ष बिहार के सीतामढ़ी में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आयोजित होता है
सौराठ मेला
यह मेला बिहार के मधुबनी जिले में स्वराज नामक स्थान पर लगता है इस मेले में मैथिल ब्राह्मण परिवार के अविवाहित लड़के शादी विवाह के उद्देश्य से आते है
सिंहेश्वर मेला
यह मेला मधेपुरा जिला के सिंहेश्वर स्थान में एक प्राचीन शिव मंदिर में प्रत्येक वर्ष शिवरात्रि के अवसर पर लगता है
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